मैंने यह संस्थान शुरू करने का साहस क्यों किया?
(Why I Dared to Open the Institute?)

मैं किसी नई खोज, अधिकार (authority), या प्रत्यक्ष परंपरा (lineage) का दावा नहीं करता।​ मेरा यह साहस एक अलग स्रोत से उत्पन्न हुआ— इस जीवंत अनुभूति से कि मनुष्य एक पवित्र “प्रक्रिया में विकसित हो रहा अस्तित्व” (work-in-progress) है,​ और उसकी प्रवृत्तियों (impulses) को एक उच्च उद्देश्य की ओर मोड़ा जा सकता है—​ परम सत्य (Supreme) का साधक बनने के लिए

  • एक बड़ी रेखा खींचने की समझ मैं इसे इस प्रकार समझता हूँ:​ एक बड़ी रेखा खींचना, जिससे पहले से खींची गई छोटी रेखा अपने आप छोटी हो जाए। यह बड़ी रेखा कोई नई खोज नहीं है,​ बल्कि एक दिशा (orientation) है— एक ऐसा संकल्प,​ जिसमें हम अपनी प्रवृत्तियों को सच्चाई (sincerity) में परिष्कृत करते हैं।
  • Fourth Way के प्रति मेरा दृष्टिकोण इस परिवर्तन के लिए मेरा मार्ग “Fourth Way” रहा है। लेकिन जब मैं “Fourth Way” की बात करता हूँ,​ तो मेरा आशय उसकी मेरी अपनी समझ और व्याख्या से होता है। इसके मूल सिद्धांत स्थिर हैं,​ लेकिन इसकी साधना लचीली (malleable) है—​ क्योंकि हर साधक के अनुसार इसका अनुभव अलग होता है। जैसा कि George Gurdjieff ने कहा था: यदि यह मनुष्य के संतुलित (harmonious) विकास की ओर नहीं ले जाता,​ तो यह Fourth Way नहीं है।​ और यदि यह किसी व्यक्ति के संतुलित विकास का कारण बनता है,​ तो वही Fourth Way है।
  • जैसे कि जॉर्ज गुरजिएफ ने कहा था: यदि यह मनषुय के सतंलुित (harmonious) विकास की ओर नहीं ले जाता,​ तो यह फोर्थ वे नहीं है।​और यदि यह किसी व्यक्ति के सतंलुित विकास का कारण बनता है,​ तो वही फोर्थ वे है।
  • अनुभव से उपजा विश्वास इस मार्ग पर चलते हुए, मेरा विश्वास धीरे-धीरे विकसित हुआ। कुछ गुण (virtues) मेरे भीतर ऐसे प्रकट हुए,​ जिन्हें मैंने विकसित नहीं किया था—​ बल्कि वे इस यात्रा के दौरान स्वयं उजागर हुए। इन्हीं गुणों ने वह आधार तैयार किया,​ जिस पर मैंने यह संस्थान शुरू करने का साहस किया।

वे आधारभूत गुण (Core Virtues

सहानुभूतिपूर्ण कल्पना (Emphatic Imagination)​ — स्वयं से परे जाकर अनुभव करने और महसूस करने की क्षमता

दूसरों का मूल्यांकन न कर पाने की पूर्ण क्षमता — बिना किसी निर्णय या निंदा के, पूर्ण स्वीकृति

अजनबियों का सहज विश्वास (Being Confided in by Strangers)​ — एक ऐसा स्वाभाविक भरोसा, जिसे अन्य लोग महसूस करते हैं

Kaizen एकमात्र प्रेरणा के रूप में​ — निरंतर सुधार और परिष्कार की जापानी सोच, जो हर कदम का मार्गदर्शन करती है

अंतिम समझ

मैंने इन गुणों का निर्माण नहीं किया।​ मैंने केवल उन्हें पहचाना। और उन्हें पहचानते हुए यह समझा कि​ वे केवल मेरे लिए नहीं हैं—​ बल्कि दूसरों के लिए एक प्रेरणा और उत्प्रेरक (catalyst) बनने के लिए हैं।

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