यह संस्थान क्यों? (Why this Institute?)

जब मैं लोगों को छोटी-छोटी बातों पर संघर्ष करते देखता हूँ, तो यह मुझे भीतर तक पीड़ा देता है।​ क्रोध एक अत्यंत मूल्यवान ऊर्जा है।

मान लीजिए हमें अपने घर, अपने समाज या अपने देश की रक्षा करनी है—​ क्या यह बिना वास्तविक और सच्चे क्रोध के संभव है?

लेकिन क्या केवल क्रोध ही पर्याप्त है?​ नहीं।​ सच्चे क्रोध को प्रभावी बनाने के लिए उसे सही दिशा देना और व्यवस्थित (institutionalize) करना आवश्यक है।

ऊर्जा को दिशा देने की आवश्यकता

यह सिद्धांत केवल क्रोध पर ही नहीं, बल्कि हमारी सभी प्रवृत्तियों (impulses) पर लागू होता है।

मूल प्रश्न यह है:​ हम अपनी प्रवृत्तियों को इस तरह कैसे संचालित करें कि वे हमें नियंत्रित करने के बजाय हमारी सेवा करें?

जैसे सेना में प्रशिक्षण के माध्यम से अनुशासन विकसित किया जाता है, वैसे ही इस स्तर का नियंत्रण भी अर्जित करना पड़ता है।


लेकिन यहाँ एक महत्वपूर्ण अंतर है:
  • सैन्य अनुशासन थोपा जाता है
  • जबकि आत्म-अनुशासन स्वेच्छा से अपनाया जाता है

संस्थान का उद्देश्य

यह संस्थान इसी स्वैच्छिक अनुशासन को विकसित करने के लिए अस्तित्व में है
यह एक ऐसा प्रशिक्षण है जो दबाव (suppression) नहीं, बल्कि परिवर्तन (transformation) पर आधारित है।

Fourth Way का महत्व

मेरे अनुभव में, इस लक्ष्य को प्राप्त करने के सबसे प्रभावी मार्गों में से एक है “Fourth Way”,​ जिसे George Gurdjieff ने सिखाया और P. D. Ouspensky ने विस्तार से समझाया।

“Fourth Way” केवल क्रोध नियंत्रण या तनाव कम करने का तरीका नहीं है—​ यह उससे कहीं अधिक गहरा और व्यापक है।

एक गहरी समझ

यह उस कला की तरह है जिसमें हम एक बड़ी रेखा खींचते हैं,​ जिससे पहले से खींची गई छोटी रेखा अपने आप छोटी हो जाती है।

इसी प्रकार, जब हम अपनी प्रवृत्तियों को परम सत्य (Supreme) की उपस्थिति में रखते हैं,​ तो वे स्वाभाविक रूप से संतुलित और नियंत्रित हो जाती हैं।

जीवन से जुड़े रहते हुए साधना

“Fourth Way” एक ऐसा मार्ग है जो त्याग (renunciation) की मांग नहीं करता।

यह हमें संसार से दूर जाने के लिए नहीं कहता,​ बल्कि सचेत रूप से उसी में जीने की प्रेरणा देता है।

संस्थान का आधार

यह संस्थान इसी सिद्धांत पर आधारित है:

  • साधकों को उनकी प्रवृत्तियों को सही दिशा देने में सहायता करना
  • उनकी जागरूकता (awareness) को परिष्कृत करना
  • और उन्हें अनुशासन एवं गरिमा के साथ परम सत्य की ओर अग्रसर करना

क्या आप हमारे इस प्रस्ताव के साथ कोई जुडाव महसूस करते हैं
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